खुली कांगियारी (लूज स्मट

 लक्षण  : 

      गेहूँ की बालियां काले पाऊडर के रूप में बदल जाती हैं। रोगी पौधों में प्राय: बालियां निकलने से पूर्व सबसे ऊपरी पत्ती (फ्लैग लीफ) पीली हो जाती है। यह रोग प्रदेश के सभी भागों लगभग सभी किस्मों में पाया जाता है।

रोकथाम:

            1 धूप उपचार द्वारा रोकथाम: मर्इ-जून के महीने में किसी शांत एवं धूप वाले दिन प्रात: 8 से 12 बजे तक बीज को पानी में 4 घंटे भिगोने के बाद उसे पतली परत के रूप में (40 किलोग्राम बीज की मात्रा 15 वर्ग गज)पक्के फर्श पर सुखा लें। इसे किसी तिरपाल, कपड़े या बोरी आदि से ढकें। सुखाये बीज को बोने के समय तक किसी सूखे स्थान पर रखें। धूप उपचार के बाद किसी दवा उपचार की आवश्यकता नहीं।

            या

       उन्नत सौर ताप उपचार (सितम्बर माह में): यदि किसी कारणवश सौर ताप उपचार मर्इ-जून माह में नहीं किया गया हो तो सितम्बर माह में भी किसी शांत एवं धूप वाले दिन कर सकते हैं। इस उपचार में 40 किलोग्राम बीज को 40 लीटर पानी में भिगोया जाता है इसके लिए गेलवेनार्इज्ड टब (36‘‘ x 36‘‘ ऊपरी चौड़ार्इ, 24‘‘ x 24‘‘ - सतह की चौड़ार्इ, 13‘‘ - गहरार्इ) उपयुक्त होगा। बीज को पानी में डालने के बाद टब के मुंह पर एक पारदर्शी पॉलीथीन कस कर बांध दें और 8 बजे प्रात: से 2 बजे दोपहर तक धूप में ही रहने दें। 6 घण्टे भिगोने के बाद बीज को पानी से निकाल लें और धूप में पतली परत के रूप में पक्के फर्श पर फैला कर पूर्णतया सुखा लें। पूर्णतया: सूखे बीज को दांतों से तोड़ने पर कड़क की आवाज़ आयेगी। सुखाये बीज को बिजार्इ तक किसी सूखे स्थान पर रखें। इस उन्नत सौर ताप उपचार से गेहूँ की खुली कांगियारी,पत्तों की कांगियारी करनाल बंट बीमारियों के बीज जन्य बीजाणुओं का प्रभावी नियन्त्रण हो जाता है।

            2.  दवा उपचार : वीटावैक्स या बाविस्टिन 2 ग्राम या टैब्यूकोनाजोल (रैक्सिल-2 डी. एस.) 1 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से सूखा उपचार करें।

       सावधानियां : रोगी पौधों को बालियां दिखार्इ देते ही सावधानीपूर्वक निकाल कर जला या दबा दें।